प्रशासन पर वाहन पासरों का सिंडीकेट पड़ रहा भारी, रनटोला में 3 घंटे जाम
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के आखिरी छोर पर स्थित तथा चार राज्यों से गिरे सोनभद्र में प्रशासन पर ओवरलोड वाहनों का संचालन कराने वाला सिंडिकेट भारी पड़ रहा है। इसी सेटिंग की आड़ में बगैर परमिट की भी गाड़ियां गुजारी जा रही हैं तो जिले में जगह-जगह होने वाले बालू के अवैध खनन को दूसरे राज्यों के परमिट के आड़ में संरक्षण दिया जा रहा है। दो दिन पूर्व ओवरलोड एवं बगैर परमिट बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया था। बावजूद बृहस्पतिवार को रेणुकूट-अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) मार्ग पर रनटोला में ओवरलोड ट्रक की वजह से तीन घंटे जाम लगा रहा। इसके चलते दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। बारिश के बीच जाम छुड़ाने में पुलिस के पसीने छूट गए। किसी तरह आवागमन सामान्य हुआ तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
म्योरपुर और पिपरी थाना क्षेत्र के बीच रेणुकूट अंबिकापुर मार्ग पर रनटोला में आरवाई सिंह घाट पड़ता है। घाट की ऊंचाई अधिक होने के कारण ओवरलोड वाहन इस पर आसानी से नहीं चल पाते इसके चलते यहां ट्रैक्टर से टोचन करके किसी तरह वाहनों को चढ़ाया जाता है। एक साथ दो-तीन ओवरलोड वाहन आ जाने से जाम लग जाता है। यहीं रास्ता बीजपुर के लिए भी जाता है जो आगे चलकर मध्य प्रदेश के सिंगरौली जनपद के जिला मुख्यालय बैढ़न पहुंच जाता है। अंबिकापुर से वाराणसी जाने का भी एकमत्र मुख्य मार्ग हरण टोला से ही होकर गुजरता है। बैढ़न से रेणुकूट के लिए शक्तिनगर अनपरा होते हुए आने का सीधा मार्ग है लेकिन घनी आबादी क्षेत्र होने तथा ओवरलोड वाहन पर कम लोगों की नजर पड़ने के कारण बीजपुर के रास्ते आना ज्यादा सुरक्षित समझा जाता है। बृहस्पतिवार को भी कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आई और सुबह आठ बजे जाम लग गया। इसके चलते डेढ़ किमी तक वाहनों की कतार लग गई। म्योरपुर और पिपरी पुलिस ने 3 घंटे तक पसीना बहाया तब जाकर ओवरलोड वाहन घाटी पार कर पाए और आवागमन सामान्य हो पाया। -ओवरलोड पर अंकुश की बजाए ट्रैक्टर पर करते हैं कार्रवाई: घाटी में ओवरलोड वाहनों को ट्रैक्टर टोचन कर चढ़ाना बिजनेस सा बन गया है लेकिन इसके बदले उन्हें कार्रवाई की भी मार सहनी पड़ती है। किसान मजदूर मंच के नेता कृपाशंकर कहते हैं कि रनटोला में जो टोचन वाले ट्रैक्टर पकड़े जा रहे है, उसे सही नहीं माना जा सकता क्योंकि प्रशासन को चाहिए कि ओवरलोड पर प्रभावी अंकुश लगाए। ऐसा करने की बजाय ट्रैक्टर पर कार्रवाई से यह साबित होता है कि अंदर खाने ओवरलोड को संरक्षण देने का काम चल रहा है।
-एसडीएम की सख्ती भी साबित हो रही बेअसर: दो दिन पूर्व एसडीएम दुद्धी रमेश कुमार की अगुवाई में महज चंद घंटों के अभियान में 21 ओवरलोड वाहन पकड़े गए, जिसमें सात बगैर परमिट के थे। यह शिकायत सिर्फ रेणुकूट -अंबिकापुर मार्ग की ही नहीं है बल्कि मारकुंडी में भी रात गहराते ही फोरलेन होने के बावजूद मार्ग वनवे हो जाता है। ओवरलोड वाहनों की लंबी लाइन लगने से कई बार लोग घंटों जाम में फस जाते हैं। रावटसगंज में भी अक्सर कागजों पर ओवरलोड वाहनों के चालान की कार्रवाई होती रहती है बावजूद शाम ढलते ही ओवरलोड वाहनों की कतार सड़क पर कैसे आ जा रही है?यह एक बड़ा सवाल है। -लोकेशन के जरिए पास होते हैं वाहन निगरानी तंत्र का भी मिलता है परोक्ष संरक्षण: मारकुंडी में जाम की स्थिति न बनने पाए इसके लिए रेणुकूट के तरफ से आने वाले ओवरलोड वाहनों की जांच के लिए डाला में खनिक चौकी स्थापित की गई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि इसकी आड़ में कुछ और लोगों की कमाई का रास्ता निकाल लिया गया। हालत यह है कि ओवरलोड वाहनों का संचालन कराना वाला सिंडीकेट जिसे बोलचाल में पासरों का ग्रुप कहा जाता है। वह जिले के सुकृत बॉर्डर से लेकर बभनी और बीजपुर के पास दूसरे राज्य से लगने वाली सीमा तक फैला हुआ है। शाम ढलते ही यह गिरोह सक्रिय हो जाता है और मोबाइल लोकेशन के जरिए अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना देकर वाहनों को सुरक्षित पास कराने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कई बार अधिकारी या उनके करीबियों भी इसके संरक्षक होने की बात सामने आती है। कुछ साल पूर्व एक एसडीएम के चालक का ऑडियो वायरल हुआ तो आनन-फानन में चालक को निलंबित कर मामले को ठंडा कर लिया गया। कुछ माह पूर्व एक सूची की भी बात चर्चा में आई। तत्कालीन डीएम ने वाहनों की चेकिंग का अभियान ही छेड़ दिया लेकिन उनके जाने के साथ ही मामला शांत हो गया।
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