पावर प्रोजेक्ट के ऐश डैम का काम रोका, बैठाई जांच
पावर प्रोजेक्ट के ऐशडैम का काम रोका, बैठाई जांच
- पत्थर से बोल्डर तोड़ कर प्रयोग करने की जांच के लिए पहुंची थी टीम - एनओसी के कागजात न मिलने पर एसडीएम ने की कार्रवाई
सोनभद्र। बगैर एनओसी के ऐशडैम का निर्माण कराया जाना और इसकी दीवार में पास की पहाड़ी का पत्थर तोड़ कर प्रयोग किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है जांच के लिए पहुंची टीम ने संबंधित कागजात मौके पर ना पाकर काम रुकवा दिया है प्रदूषण नियंत्रण विभाग की तरफ से एनओसी मामले के जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
एक पावर प्रोजेक्ट की तरफ से बभनी ब्लॉक के बरवाटोला में ऐशडैम का निर्माण कराया जा रहा है। कुछ लोगों ने जिला प्रशासन से शिकायत की थी कि ऐशडैम के कार्य में नजदीक की पहाड़ी से पत्थर तोड़वाकर प्रयोग किये जाने की शिकायत की थी। इसके परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार को एसडीएम दुद्धी रमेश कुमार मौके की जांच के लिए पहुंचे। निरीक्षण के दौरान पाया कि डैम की दीवार जंगल की पहाड़ी से तोड़ कर बनाया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण की तरफ से जारी गाइड लाइन का भी पॉलन नही किया जा रहा है। मौके पर मौजूद दूसरे लोगों का कहना था कि मानक की अनदेखी का निर्माण किया गया तो यहां भरी जाने वाली राख रिस कर आसपास की मिट्टी और जल को प्रदूषित कर सकता है। एसडीएम ने काम करवा रहे लोगों से एऐशडैम निर्माण के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एनओसी की मांग की लेकिन वह उपलब्ध नहीं करवा पाए। इसको गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग को विशेषज्ञों की टीम गठित कर जांच करने का आदेश दिया वही जांच पूरी होने तक के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। उधर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी राधेश्याम ने सेल फोन पर स्वीकार किया कि उनके विभाग की तरफ से बरवाटोला में ऐशडैम निर्माण के लिए कोई एनओसी नहीं दी गई है। बताया कि कोयले की राख में मरकरी और फलोराइड, सीसा,जैसे विषैले तत्व होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते है। बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐशडैम निर्माण के लिए नियम और गाइड लाइन बनाई है। उनमें निर्धारित किए गए मानकों को पूरा कर के ही ऐशडैम का निर्माण कराया जा सकता है। एसडीएम दुद्धी का निर्देश प्राप्त हुआ है। जल्द ही टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। वहीं पीएसआई देहरादून के वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. अनिल गौतम का कहना था कि कोयले की राख सीधे गड्ढे या खेत मे भरने से वहां की मिट्टी और पानी दोनों जहरीला हो जाता है, जिसका असर सोनभद्र के प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में देखा भी जा रहा है । एनओसी के साथ गाइड लाइन का पॉलन जरूरी है अन्यथा मानव स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
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