हाईकोर्ट सख्त: कमेटी गठित कर गांवों में रोके कोरोना संक्रमण, शिकायतों का करें त्वरित समाधान, दवा-समुचित इलाज की करेंं व्यवस्था
प्रादेशिक डेस्क ------------------- प्रयागराज। कोराना की रोकथाम में होती लापरवाही और टेस्टिंग में आती कमी को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते समय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की बेंच ने इसके लिए राज्य सरकार को कई आदेश (दिशा- निर्देश) दिए। सबसे पहले सभी जिलों में दो दिनों के भीतर तीन सदस्यीय कमेटी (महामारी लोक शिकायत समिति) गठित करने का निर्देश दिया है। सदस्यों को नामित करने का काम जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। यह कमेटी ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए अपनाए जा रहे उपायों और कोरोना मरीजों की स्थिति जानेगी। इससे जुड़ी शिकायतों की सुनवाई भी करेगी।
इस कमेटी में सीजेएम रैंक के न्यायिक अधिकारी, मेडिकल कॉलेज या किसी बड़े सरकारी अस्पताल के चिकित्सक और अपर जिला अधिकारी रैंक के एक-एक अफसर को नामित किया जाएगा। यह कमेटी ग्रामीण इलाकों में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की निगरानी करेगी। उनकी शिकायतों को दूर करेगी और स्थानीय प्रशासन तथा सरकार को अपने सुझाव भी देगी। कमेटी गठित कर दूर करें दवा और सही इलाज ना मिलने की शिकायतेंः हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दवा और सही इलाज न मिलने की शिकायतों को दूर करने के लिए भी कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति क्या है और बीमारी को लेकर किस तरह से टेस्टिंग की जा रही है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? इसकी भी पूरी जानकारी तलब की है। हाई कोर्ट ने ग्रामीण इलाकों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य चंद्र पर कोरोना के इलाज की व्यवस्था न किए जाने पर चिंता जताई है और यह माना है कि इलाज के अभाव में लोगों की मौतें हो रही हैं जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसको दृष्टिगत रखते हुए ऑक्सीजन की कमी से पीड़ित तथा खांसी जुखाम बुखार के लक्षणों वाले मरीजों को कोरोना का संदिग्ध मरीज मानते हुए समुचित उपचार सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है। एसडीएम से करें सीधे शिकायतः ग्रामीण इलाकों में पीड़ित लोग सीधे एसडीएम से शिकायत कर सकते हैं। एसडीएम इन शिकायतों को खुद दूर करेंगे या शिकायत समिति को भेजेंगे।
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