चुनाव के दौरान मृत शिक्षकों-कर्मचारियों को दें एक करोड़ मुआवजा
प्रयागराज। पंचायत चुनाव के दौरान हुई अधिकारियों-कार्मिकों की मृत्यु पर भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार की तरफ से तय किए गए 30 लाख के मुआवजे को काफी कम बताते हुए इसे कम से कम एक करोड़ करने के लिए कहा है। राज्य सरकार को इस पर पुनर्विचार करते हुए 17 मई को कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर होने वाली सुनवाई के दौरान स्थिति से अवगत कराने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चुनाव के दौरान मतदान अधिकारियों (शिक्षकों और कर्मचारियों) की मृत्यु अहम मुद्दा है। मतदान हो रहा था या आयोजित किया जा रहा था, यह दोनों परिस्थितियों में लागू होता है।महामारी की आशंका के बीच मतदान अधिकारियों -कर्मियों को जोखिम लेने के लिए मजबूर किया गया। यह ऐसा मामला नहीं है कि किसी ने स्वेच्छा से चुनाव के दौरान अपनी सेवाओं को प्रस्तुति दी बल्कि उसे अनिवार्य बना दिया गया था। ऐसे में कोरोना महामारी के चलते परिवार की रोटी कमाने वाले की जान चली गई है। वह भी तब जब शिक्षकों और कर्मचारियों ने राज्य सरकार तथा राज्य चुनाव आयोग के दबाव में आकर ड्यूटी थी इसलिए क्या दायित्व बनता है राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग आश्रितों को क्षतिपूर्ति प्रदान करें। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से जो राशि तय की गई है वह काफी कम है इसे कम से कम एक करोड़ किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए। प्रकरण में 17 मई को अगली सुनवाई की तिथि निश्चित की गई है।

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